Saturday, 11 April 2015

पड़ोस की ब्यूटी पार्लर वाली

पड़ोस की ब्यूटी पार्लर वाली

हेलो दोस्तों.. मेरा नाम राजीव है और मेरी उम्र 23 साल है. मैं महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ. दोस्तों मुझे सेक्सी कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है और मुझे जब भी टाईम मिलता है इस साईट से जुड़ा रहता हूँ. दोस्तों फिर एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी अपनी कहानी आप सभी को सुनाऊँ.. तो आज मैं आप सभी के सामने अपनी एक सच्ची कहानी लेकर आया हूँ और अगर मुझसे इसमें कोई गलती हो तो प्लीज मुझे माफ़ करना क्योंकि यह मेरी पहली कहानी है.

दोस्तों मेरी खुद की एक दुकान है और उसके पास में ही एक लेडीस ब्यूटी पार्लर है उन्हें मैं सुनीता के नाम से बुलाता हूँ.. वो दिखने में तो एकदम सेक्सी है और अगर आप देखोगे तो लंड खड़ा हो जाएगा. मैंने वहाँ पर अभी कुछ समय पहले ही दुकान खोली है.. लेकिन वो वहाँ पर पिछले 5 साल से है. मैं उनसे ज़्यादा बात नहीं करता था.. बस दूर से उनको देखा करता था.. वो बरसात का मौसम था और शाम के कुछ 6-7 बजे होंगे.. तभी बहुत ज़ोर से हवा के साथ बारिश होने लगी थी और लाईट भी चली गई.

उनका पति बहुत दारू पीता था.. तो वो उस दिन ड्रिंक करके दुकान पर लड़खड़ाते गिरते पड़ते आया. उसके पूरे कपड़े कीचड़ से सने हुए थे.. शायद हो कहीं कीचड़ में गिरकर आया था और उसके पास से बहुत तेज दारू की बदबू आ रही थी और वो आते ही सुनीता को गालियां बकने लगा. सुनीता ने उनसे कहा कि आप घर जाओ मैं अभी कुछ देर में घर आती हूँ. तो मुझे यह सब देखकर बहुत बुरा लगा और मैंने सुनीता से पूछा कि सुनीता क्या वो हमेशा ऐसा करते है? तो उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया और अपने पार्लर में जाकर रोने लगी.. मुझे अच्छा नहीं लग रहा था. तो मैं भी उनके पीछे पीछे अंदर चला गया और उनसे कहा कि आप बहुत परेशान है ना? तो वो मुझ पर बहुत ज़ोर से चिल्लाई और कहा कि तुम मुझे और परेशान ना करो और प्लीज यहाँ से चले जाओ. तो मैं भी वहाँ से बाहर आ गया और अपनी दुकान में चला गया. फिर 8.30 बजे उन्होंने मुझे आवाज़ लगाई.. मैं भी झट से उनके यहाँ चला गया और वहाँ पर जाकर उनके सामने खड़ा हो गया. तो उन्होंने मुझे सॉरी कहा.. तो मैंने कहा कि कोई बात नहीं सब ठीक है और फिर वो वापस रोने लगी और मुझे सब बताने लगी कि उनके पति रोज़ ड्रिंक करके आते है और गालियां बकते है और कभी कभी उन्हें मारते भी है.

फिर मैंने फिर उन्हें पीने को पानी दिया और ना रोने को कहा. हमारी दुकान के बाहर बारिश हो रही थी और हमें घर के लिए निकलना था.. लेकिन बारिश की वजह से मैं निकल नहीं पा रहा था. तो मैंने सोचा कि क्यों ना यहीं पर बैठकर थोड़ा सुनीता का मूड ठीक किया जाए.. मैंने फिर इधर उधर की बातें की और उनका मन बहलाने लगा. उनका मूड जैसे जैसे ठीक हो रहा था.. मेरा लंड खड़ा हो रहा था और मैं बार बार उनके बड़े बड़े बूब्स की तरफ देख रहा था. उस दिन उन्होंने काली कलर की साड़ी पहनी हुई थी और उनके बड़े बड़े बूब्स ब्लाउज में से और भी सुंदर दिख रहे थे.. मेरा तो बस अब झड़ना ही बाकी था और मैं बार बार अपने लंड को सेट कर रहा था. कहीं पेंट से उन्हे मेरा खड़ा लंड दिख ना जाए.. वो अब मुझसे बहुत अच्छे से हंस हंसकर बात कर रही थी.. एकदम अच्छे दोस्त की तरह और फिर मैंने मौका देखकर उनसे पूछा कि क्या आपके पति आपको संतुष्ट नहीं करते है? तभी अचानक उनके चेहरे से मानो हँसी ही गुम हो गई और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. तो मैं टेंशन में आ गया कि कहीं वो गुस्सा ना हो जाए और यह सोचकर मैंने उनसे कहा कि चलो अब मैं घर जाता हूँ. तो उन्होंने मुझे कहा कि रुक जाओ थोड़ी देर.. बारिश बंद होने दो फिर चले जाना. तो मैं भी उनके कहने पर वहीं पर रुक गया. तो उन्होंने मुझे कहा कि तुमने अभी कुछ देर पहले ऐसा क्यों पूछा कि में संतुष्ट हूँ या नहीं? तो मैंने कहा कि मेरे दिल में आया तो मैंने पूछ लिया.. उनकी आँखें गीली हो गई थी और मैं समझ गया कि वो अपने पति से नाखुश है.. अब एक तरफ मुझे अच्छा भी लग रहा था.. क्योंकि मुझे चान्स मारने का मौका मिल गया था. फिर मैं उनके पास जाकर बैठ गया और फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके उनके कंधे पर हाथ रख दिया. उन्होंने एकदम से मेरे हाथ पर उनका हाथ रख दिया.. तो मैं समझ गया कि आज मेरी लॉटरी निकल गई.

मैं फिर उनकी पीठ पर अपना हाथ ले गया और सहलाने लगा.. उन्हे धीरे धीरे बहुत अच्छा लग रहा था और वो लंबी लंबी साँसे भरने लगी थी. तो मैंने उन्हे कहा कि एक मिनट रूको में दरवाज़ा बंद करता हूँ और मैंने उठकर उनके पार्लर का काँच खोला और अंदर से शटर नीचे खींच लिया.. उस समय लाईट भी नहीं थी.. एमर्जेन्सी बेटरी की लाईट भी कम हो गई थी. वो चुपचाप खड़ी थी और मैं उनके पास गया और उन्हे पकड़ लिया. उन्होंने भी मुझे कसकर पकड़ लिया और उनके बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे और मैं उनकी पीठ पर हाथ मसल रहा था और हम दोनों को बहुत अच्छा लग रहा था. फिर मैंने उनकी साड़ी उतार दी.. वो अब मेरे सामने सिर्फ़ ब्लाउज और पेंटी में थी.. मैंने धीरे धीरे ब्लाउज के ऊपर से ही उनके बूब्स दबाना, सहलाना शुरू किया. तभी उन्होंने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और दबाने लगी.. मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था. मैंने फिर उनको पूरा नंगा कर दिया और मैं भी नंगा हो गया.. फिर मैंने उन्हे किस किया और थोड़ी देर बाद मेरा खड़ा लंड पूरा उनकी चूत में घुस रहा था और वो आहह उफ्फ्फ सीईईईई कर रही थी.

तो मैंने उन्हे गोद में उठाकर कुर्सी पर बैठाया और उनके दोनों पैर कुर्सी के हेंडल पर रखने को कहा. जिससे उनकी चूत चौड़ी हो गई. उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे और चूत रस से एकदम गीली थी.. थोड़ी देर बाद में उनकी चूत में अपनी जीभ घुमाने लगा और चूत को अपनी ऊँगली से चौड़ा करके और अंदर चलाने लगा और मैं अपनी जीभ को बहुत अच्छे से चूत में घुमा फिरा रहा था.. वो आहह उफ्फ्फ सीईई कर रही थी और मेरे सर को अपनी चूत पर दबा रही थी. तभी उनकी चूत से पानी निकलने लगा और मैं अपनी उंगली उसमे डालकर ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा और वो झड़ गई. मेरे ऊँगली के ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने की वजह से वो सिहर उठी और उनकी चूत का बहुत सारा पानी एकदम बाहर निकल गया.. जैसे कि उनकी चूत का बांध टूट गया हो और वो बरसों से चूत में इकट्टा हो.. उनके पानी से पूरी कुर्सी गीली हो चुकी थी.. लेकिन वो फिर भी वैसे ही कुर्सी पर बैठी हुई थी और मैं उनके सामने खड़ा धीरे धीरे चूत में ऊँगली डाल रहा थ. तभी उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और हिलाने लगी. मैं चाहता था कि वो मेरे लंड को चूसे और फिर मैंने अपना लंड पकड़ा और उनके मुहं के पास ले गया. वो भी समझ गई.. उन्होंने भी लंड को पकड़ा और पागलों की तरह चूसने लगी और काटने भी लगी.. जैसे वो कोई टॉफी चबा रही हो.

फिर मैं झड़ने वाला था और मैंने उनसे कहा कि मेरा निकालने वाला है. तभी उन्होंने जल्दी से लंड को अपने मुहं से बाहर निकाला और ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी और फिर एकदम मेरा पूरा शरीर अकड़ गया और लंड से एक जोरदार पिचकारी निकली और मैं झड़ गया और उनका हाथ मेरे वीर्य से भर गया था और मुझे अब बहुत अच्छा महसूस हो रहा था. फिर मैंने उन्हे वहाँ से उठने को कहा और में कुर्सी पर बैठ गया और उन्हे अपने ऊपर बैठा दिया और अब उनकी गांड मेरे लंड पर थी और मेरा एक हाथ उनके बूब्स पर था. मैं उनके बूब्स दबा रहा था और निप्पल से खेल रहा था. ऐसा करते करते मुझे करीब आधा घंटा हो चुका था और मेरा लंड वापस टाईट हो गया. मैंने उन्हे उठाया और नीचे लेटा दिया और फिर लंड को चूत में डालकर उन्हे चोदने लगा. मेरे हर झटके से वो पूरा हिल जाती थी और चुदाई के मजे ले रही थी. उस दिन मैंने उन्हें इतना चोदा जिसकी कोई हद नहीं और उसके बाद अभी तक मैं उन्हे बहुत बार चोद चुका हूँ. दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आपको बहुत पसंद आई होगी ..

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