Saturday, 10 May 2014

रायपुर की दो सहेलियाँ - Raipur Ki Do Saheliyan

रायपुर की दो सहेलियाँ - Raipur Ki Do Saheliyan

आज अपने पाठकों को काफी दिनों बाद नई कहानी दे रहा हूँ।

मार्च के दूसरे सप्ताह की बात है जब मुझे एक लड़की का फोन आया छत्तीसगढ़ से। उसने बताया कि वह इन्जीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, अन्तर्वासना की पाठक है तथा उसको मेरी कहानियाँ बहुत पसंद हैं। वह और उसकी सहेली मेरी नई कहानी का इंतज़ार करती रहतीं हैं।

दोनों लड़कियों के नाम बदल कर दे रहा हूँ।

उसने फ़ोन किया था इतवार को, अपना नाम बताया सविता और अपनी सहेली का नाम शालिनी बताया और उम्र बताई 22 साल। मैंने उनको बताया कि मैं तो 29 साल का हूँ तो बोली कि उसको कोई दिक्कत नहीं है।

मैंने उसको पूछा- क्या आप जानती हैं कि मैं पैसे लेकर काम करता हूँ !

उसने बोला- हाँ ! आपकी कहानी पढ़ी है और मुझे कोई परेशानी नहीं है।

उसने कहा कि वह मेरा आने जाने का रहने का और जो पैसे बनतें हैं, देगी और एडवांस में आधा पैसा अकाउंट में डाल देगी।

हमने उसको अपना नंबर दे दिया और तारीख तय हो गई। सविता ने उसी दिन दस हज़ार रुपये भेज दिये और फोन से कॉन्फर्म कर लिया।

मैंने तुरंत अपना आरक्षण करवाया और अगले हफ्ते के बाद तय तारीख पर गाड़ी से रवाना हो गया। अगले दिन मैं रायपुर पहुँच गया और सविता तो खुद ही मुझे स्टेशन पर लेने के लिए खड़ी थी।

उसने बताया की उसकी सहेली शालिनी के घर मुझे रुकना है, उसके घर पर कोई नहीं है, सब लोग नागपुर में रहते हैं, यह उनका नया घर है इसलिए सविता और शालिनी रहती हैं।

उनका घर छोटा लेकिन सुंदर था। उनसे मैंने पूछा- घर की सफाई कौन करता है?

शालिनी बोली- काम वाली आती है, वही सफाई करती है और खाना बनाती है।

शालिनी और सविता दोनों ही देखने में सुंदर तो नहीं थीं और रंग दोनों का बहुत दबा हुआ था और शरीर भरा हुआ था। कहने की जरूरत नहीं कि आकर्षित कर लेने वाला शरीर नहीं था। लेकिन दोनों स्वाभाव से अच्छी थीं।

उन्होंने बताया कि जब उन दोनों ने मेरी कहानी पढ़ी तो उनको मुझसे काम लेने की सूझी। उन्होंने बताया की उनका शारीरिक सम्बन्ध पहले भी हो चुका है लेकिन वो सब पुरानी बात हो गई है। वो मुझसे अब काम लेना चाहती हैं।

मैं बोला चलो- मैं कर दूँगा।

दोपहर हो चुकी थी, नहा कर, खाना खाकर मैं कमरे में गया और सो गया। उनके घर काम वाली आई तो उसको इन लोगों ने बताया कि मैं उनके चाचा का लड़का हूँ। उसने काम किया और खाना बना कर चली गई।

रात को मैंने उनसे पूछा- आप दोनों साथ में सर्विस लेंगी या अलग अलग?

इस पर दोनों साथ बोल पड़ी- साथ में, पर आज रात में कुछ काम है प्रोजेक्ट का, कॉलेज में सुबह को जमा करके जल्दी आ जाएँगी।

मुझे भी आराम करने का मौका मिल गया।

रात भर आराम किया और सुबह देर तक सोया। दोनों लड़कियाँ कॉलेज चली गई थी, मैं अकेला घर पर था। मेज पर मेरे लिए नोट रखा था जिस पर लिखा था कि वो जल्दी आ जाएँगी, नाश्ता मेज़ पर रखा है, कोई जरूरत हो सामान देख लें।

मैं नहाया, फिर नाश्ता किया और टीवी लगा कर बैठ गया। दोनों साढ़े ग्यारह तक घर आ गई। जल्दी आने का कारण मैं जानता ही था।

उन लोगों ने आकर तुरंत कपड़े बदले और मुझे अपने कमरे में बुला लिया।

मैं गया तो उन लोगों ने कहा- तुम्हारी कहानी में तुमने औरतों की चूत में क्या क्या किया है, हमारा भी वैसे ही करो।

उन लोगों ने अपने बदन से अपने आप ही अपना गाऊन उतार दिया, वो नंगी थी, ब्रा तक नहीं थी।

लेकिन उनकी बुर पर बहुत ज्यादा बाल थे। मैं बोला- पहले तो आपकी झांटें साफ़ करनी होंगी, तभी काम शुरू हो पाएगा।

उन लोगों ने कहा- चलो जो भी करना है, करो, अब तुम जैसा करोगे हम करायेंगी।

फिर सबसे पहले शालिनी को लेटाया जमीन पर मोटा गद्दा लगा कर और उसके बाल को कैंची से काट दिए। फिर रेज़र से उसकी बुर के ऊपर के सारे बाल साफ़ कर दिए। उसकी चूत के पास के बाल साफ़ करने में दिक्कत आ रही थी, वजह साफ थी क्योंकि उसका पानी निकल रहा था और चूत चिकनी हो गई थी। फिर क्या करता, उसकी चूत की पंखुड़ी को पकड़ा एक हाथ से और दूसरे से धीरे से बाल साफ़ करने लगा। इस काम में ही आधा घंटा लग गया।

उसको साफ़ करने के बाद सविता को लेटाया, उसके बाल साफ़ किये, जब चूत पर हाथ लगाया तो उसकी चूत तो ज्यादा गीली थी, वजह साफ़ थी कि शालिनी को देख कर उसका पानी निकल गया था।

उसका साफ़ करते करते मैं बोला- आप लोग अपनी झांट साफ़ क्यों नहीं करतीं?

तो बोली- इनसे कोई दिक्कत नहीं थी इसलिए।

जब दोनों के बाल साफ़ हो गये तब मैंने उन लोगों को देखा।

भई क्या बात थी ! रंग तो सावला लेकिन चूत लाल लाल !

देख कर दिल तेज चलने लगा, यार अंगारा लगने लगा, कान गर्म हो गये।

शालिनी भी लेटी थी और सविता भी। मैं शालिनी के पास पहले गया क्योंकि उसकी बुर और चूत को पहले साफ़ किया था और वही ज्यादा प्यासी हो रही थी।

दोनों को मैंने साथ साथ लेटाया, शालिनी की चूत पर अपनी जबान चलाई और सविता के चूत पर उंगली लगा दी।

सविता गनगना गई। शालिनी की चूत की ऊपरी पंखुड़ी पर अपनी जबान रगड़ना शुरू कर दिया। शालिनी की चूत चूसनी शुरू की और कब उसकी चूत के अंदर जबान घुसती चली गई पता ही नहीं चला।

मैंने सविता को कहा- क्या तुम थोड़ी मदद करोगी?

बोली- कैसे?

मैंने उसे कहा- जब तक शालिनी की चूत चाट रहा हूँ, तब तक उसकी दोनों टांगें खोल कर रखो और अपनी बुर उसके मुँह पर लगा दो।

उसको पहले तो लगा कि न करे लेकिन जब मैंने बताया कि अच्छा लगेगा, करो !

तब शालिनी तैयार हो गई और सविता अपनी बुर उसके मुँह पर लगा कर लेट गई और शालिनी की टांग खींच कर खोल दी। अब तो उसकी बुर खुल कर सामने आ गई।

जबान जहाँ तक जा रही थी वहाँ तक का रस पिया मैंने। उसकी चूत के ऊपर की कली को रगड़ रहा था और दस मिनट हुए थे कि वो अकड़ गई और अपने हाथ से मेरा मुँह अपनी चूत के अंदर दबाने लगी और इतने में उसने अपना पानी छोड़ दिया। उसका पानी निकला लेकिन महक ऐसी थी कि मैं उसका सारा माल चाट गया। वो निढाल होकर लेट गई।

अब सविता आई, उसको लेटाया और शालिनी को सहायता करने को बोला।

उसने भी वैसे ही किया लेकिन इस बार उसको मैंने बोला कि वह मेरे लिंग को चूसे और मैं उसकी दोस्त की बुर चाटूँगा। सविता अपने आप से ही मेरा मुँह अपनी चूत के अंदर घुसा रही थी कि खूब अंदर चला जाये। वह अपने पैर खुद ही फैलाये थी।

उसका पानी निकल रहा था और वो उचक उचक कर पानी निकालने लगी, लिसलिसा सा था लेकिन चाट गया।

अब मैं भी थक गया था, मुँह दर्द हो रहा था। वे दोनों भी थक गई थी। हम तीनों लेट गए और बात करने लगे।

सविता बोली- तुमको चूत चाटने में घिन नहीं आती?

मैं बोला- तुमको चूत चटवाने में मजा आया ना? और शालिनी तुमको लिंग चूसने में?

दोनों साथ बोल पड़ी- हाँ मज़ा आया।

तब मैं बोला- फिर यह प्रश्न क्यों?

और फिर थोड़ी देर आराम करके मैं अपने कमरे मैं गया और लेट गया। थोड़ी देर में शालिनी आई और बोली- सविता सो गई है, मुझसे रहा नहीं गया, मैं आ गई, मुझे शांत कर दो। मैं बोला- ठीक है, फिर सविता की बारी में मत बीच में आना।

बोली- ठीक है।

मैं उसको बिस्तर पर लेटा कर उसका वक्ष से खेलने लगा उसका बदन काला और थोड़ा भरा था। मैं उसकी चूची पी रहा था और मसल रहा था।

वो इतना मजा ले रही थी कि अपने हाथ को वह अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी।

मैंने धीरे से उसकी चूत के अंदर उंगली डाल दी और धीरे से उंगली करने लगा।

उसकी हालत हो गई बेकाबू, वो बोली- अपना लिंग डाल दो जल्दी ! नहीं तो मर जाऊँगी।

मैंने देखा, उसका पानी आ रहा था। अब मैंने उसके अंदर लिंग डाल दिया और वो अकड़ गई। मैं उसको चोदने लगा, उसके चूतड़ दबा कर उसको मसलने लगा।

वो पूरा साथ दे रही थी। कोई 5-6 मिनट में ही वो झड़ गई और बोली- मैं गई !

और साथ ही मैंने भी अपना पानी गिरा दिया उसकी चूत के अंदर !

वो अपने कमरे में चली गई।

रात को सविता बोली- मैं आज तुम्हारे कमरे में रहूँगी, शालिनी से बात कर ली है मैंने !

मैं बोला- ठीक है।

रात का खाना खाया और तकरीबन साढ़े दस बजे मैं अपने कमरे में गया।

थोड़ी देर में सविता आई, उसने कहा- आज रात मेरे को शांत कर दो।

मैं भी उसका इंतज़ार कर रहा था। उसने आते ही अपना मैक्सी उतार दी और केवल बिकिनी मैं खड़ी होकर मेरा बरमुडा उतार कर मेरे लिंग को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी।

मैंने भी उसका बदन छुआ और उसको गले से लगा लिया। वह इसको समझ पाती, उतनी देर में उसकी चड्डी मैंने खींच कर निकाल दी। वह नंगी थी। मैं उसके स्तन चूसने लगा, धीरे से उसके पीठ पर हाथ ले जाकर पीछे से सहलाने लगा और धीरे से उसके चूतड़ों को दबाया। उसका बदन मेरा साथ देने लगा। उसने अपने आपको मेरे पास ढीला छोड़ दिया। मैं उसकी गाण्ड के पास से चूत तक अपनी हथेली से उसको रगड़ रहा था और ऊपर उसका दूध चूस रहा था।

इसकी चूत भी कसी हुई और ऊपर तो काला रंग लेकिन अंदर से लाल लाल ! क्या जानदार चीज है यह चूत।

फिर अचानक सविता ने कहा- रुको !

और मुझे अपने साथ बाथरूम ले गई और कहा- अपना लिंग दो

और मेरा लिंग अपने हाथ पर रख कर उसको अपनी चूत से सटा लिया और फिर मूत दिया मेरे लिंग पर गर्म गर्म मूत ! मैं समझ पाता उसने अपना काम ककर दिया, बोली- आहा मजा आ गया।

मैं बोला- यह क्या? कहाँ से दिमाग में आया?

वह बोली- अरे यार, मैंने इन्टरनेट पर देखा था।

उसके बाद उसको मैंने उसको बिस्तर पर लेटा कर उसको पीठ के बल कर दिया और उसके ऊपर तेल डाल दिया। उसको पीठ पर खूब मला फिर उसकी जांघों को और उसके तलुए और सबकी मालिश की। वह मजा लेती रही।

फिर उसको बोला- अपने पैर फैला ले !

उसके पेट के नीचे एक तकिया लगा दिया। अब उसके चूतड़ ऊपर उठ गए और मैं आराम से उसकी चूत और चूतड़ों पर मालिश करने लगा।

मैंने धीरे से उसकी गाण्ड में तेल की बोतल का मुँह लगाया और ढेर सा तेल उसकी गाण्ड में उतार दिया और फिर धीरे से उसके चूतड़ दबाने लगा। इसकी वजह से जो तेल अंदर था धीरे से बाहर आ गया।

फिर उसको मैंने पलटा और सामने से मालिश देने को उसके ऊपर बैठ गया और उसके छाती पर तेल गिरा कर उसकी छाती को मसलना शुरू किया। फ़िर उसके पेट की और फिर उसकी टांगों को फैला कर जांघों से तक मालिश दे डाली।

वोह बोली- मजा आ गया ! अब जरा मेरी चूत की खुजली दूर करो !

और मेरे नंगे बदन को चूस कर लिंग को खड़ा करने लगी। जल्दी ही वो बेकाबू हो गई और मैंने भी अब उसको ज्यादा न तरसा कर उसकी बुर पर अपना लिंग लगा कर डाल दिया और थोड़ी देर के कसरत में ही उसकी बुर पानी छोड़ कर निढाल हो गई और अजीब सा चिपचिपा सा पानी आ गया।

अब वो लेटे लेटे बोली- जरा देख लो शालिनी जाग रही है या नहीं ! मैं वहाँ पड़े छोटे तौलिये में उसके कमरे में गया तो शालिनी सो रही थी।

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