Saturday, 10 May 2014

एक अनोखी दुर्घटना - Ek Anokhi Durghtana

एक अनोखी दुर्घटना - Ek Anokhi Durghtana

आप सभी को अभी हाल की घटी घटना बताने जा रहा हूँ, कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरूर भेजिएगा।

बात अभी दो दिन पहले की है, मैं बाजार कुछ सामान लेने जा रहा था। मैं स्कूटर पर था और मुझसे आगे दो लड़कियाँ स्कूटी से जा रही थी।

जैसा कि हर मर्द लड़कियों की तरफ़ जरूर देखता ही है, मैंने भी वही काम किया, दोनों को ध्यान से देखा, जो लड़की स्कूटी चला रही थी वो थोड़ी सेहतमन्द थी और पीछे बैठी लड़की सामान्य सी थी। आगे वाली लड़की मोटी होने के बावजूद बहुत सुन्दर थी। उसके बाल खुले हुए हवा में लहरा रहे थे, लाल रंग का टॉप और काले रंग का लोअर एकदम टांगों से चिपका हुआ, बहुत ही मस्त लग रही थी वो !

मैं उनसे 50 मीटर दूर हूंगा, अचानक भड़ाक की आवाज आई, देखा तो उसकी स्कूटी एक कार से जा टकराई थी, दोनों ही लड़कियाँ गिर गई थी, मैंने अपना स्कूटर किनारे खड़ा किया और पास गया तो दोनों ही गिरी पड़ी थी।

दो-तीन लोग दौड़ कर आ भी गए थे लेकिन कोई भी उन्हें उठा नहीं रहा था, मैं पास में गया और मोटी वाली लड़की को सहारा देकर उठाया, उसे चोट आ गई थी, पैर में मोच भी आ गई थी, वो चल नहीं पा रही थी।

पीछे वाली लड़की खड़ी हो गई थी, उसे भी चोट आई थी लेकिन शायद संकोचवश कुछ कह नहीं रही थी। मोटी लड़की को उठा कर खड़ा किया ही था कि वो जोर से चिल्लाई, उसके पैर में भी चोट आ गई थी।

वो वहीं जोर जोर से चिल्ला रही थी, अब एक और समस्या उनके सामने थी, उस दूसरी लड़की को स्कूटी चलाना नहीं आता था और मोटी वाली को चोट थी, मैंने उसे सहारा देकर खड़ा रखने की कोशिश की लेकिन फ़िर से वो मेरे ऊपर गिर पड़ी, उससे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था, काफ़ी लोग वहाँ जमा होने लगे, भीड़ लग गई थी।उसने मुझसे कहा- प्लीज, आप मुझे घर तक छोड़ दीजिए, स्कूटी मेरी सहेली लेकर आ जायेगी।

दूसरी लड़की ने कहा- ठीक है, मैं स्कूटी रिक्शे पर लाद कर घर तक लाती हूँ।

मैंने उसे अपने स्कूटर पर बिठाया और उसके घर की ओर चल दिया, वो रास्ता बताती जा रही थी, उसके बड़े-बड़े स्तन मेरी पीठ से रगड़ खा रहे थे। मैं उस वक्त इतने आनन्द में था कि ब्यान नहीं कर सकता !

उसके चुचूक तन गए थे जिसका अहसास तब मुझे हो रहा था। उसे दर्द हो रहा था लेकिन शायद वो भी मज़ा ले रही थी।

उसे लेकर मैं उसके घर पहुँचा तो घर पर केवल कामवाली थी। उसने बताया कि उसके माँ-बाप बाज़ार गये हुए हैं और वो 3-4 घण्टे के बाद लौटेंगे।

फ़िर वो चोट के बारे में पूछने लगी और बताया- दीदी, मैंने सारा काम कर दिया है, मैं अपने बच्चे के पास जा रही हूँ, मेरे बच्चे की तबीयत खराब है।

खैर मैंने उसे सहारा देकर उसके कमरे तक उसे पहुँचाया, उसे बेड पर लिटा दिया।

वो बोली- आप मुझे आयोडेक्स उठा कर दे दीजिए प्लीज !

मैं- कहाँ पर रखी है?

वो बोली- वो ड्रेसिंग टेबल के ड्राअर में है !

मैंने उसे ड्रेसिंग टेबल से आयोडेक्स उठा कर दे दी, लेकिन वो लगा नहीं पा रही थी, उसने थोड़ा झिझकते हुए कहा- प्लीज, आप पैरों में और घुटनों में लगा देंगे?

मैंने उसके हाथ से आयोडेक्स ले ली और उसका पैर सीधा करके उसके पैर में आयोडेक्स लगाने लगा, वो आँखें बन्द करके लेट गई।

मेरे हाथ उसकी टाँगों को सहलाते हुए ऊपर बढ़ रहे थे, उसकी टांगों के रोंए खड़े हो गए थे, अब मुझे भी आनन्द आने लगा था, सब कुछ शान्त था !

मैंने शान्ति तोड़ते हुए पूछा- कहीं और भी चोट आई है?

बिना बोले ही उसने अपना टॉप ऊपर किया और कमर के निचले हिस्से की ओर इशारा किया।

उसे भी अच्छा लग रहा था मेरा लण्ड अन्दर ही अन्दर मुझे तंग करने लगा था, फ़िर भी अपनी भावनाओं पर सयंम रखे हुए उसकी कमर पर आयोडेक्स लगा रहा था। एकदम गोरे से और मस्त चिकने से चूतड़ थे उसके ! बहुत ही मज़ा आ रहा था मुझे ! मैं बयान नहीं कर सकता !

दिल में आ रहा था कि अभी इसे नंगा करूँ और अपने लण्ड को उसकी चूत में घुसा दूँ। उसने अन्दर काले रंग की पैंटी पहन रखी थी गोरे और मोटे कूल्हे, उस पर काले रंग की पैंटी !दोस्तो, सोचो मेरा क्या हाल हो रहा होगा !

इतने में उसकी आवाज़ ने मुझे चौका दिया,”अगर परेशानी हो रही हो तो लोअर को हटा दो !

अन्धा क्या चाहे – दो आँखें !

मेरी तो लॉटरी लग गई।

मैंने तत्परता दिखते हुए तुरन्त यह शुभ कार्य कर डाला।

अब मुझसे नहीं रहा जा रहा था, मैंने आयोडेक्स लगाते लगाते अपना हाथ उसकी पैंटी में घुसा दिया।

वो चिंहुक उठी, बोली- आराम से करो !

मेरे लिये इतना इशारा काफी था, मैं आराम से उसकी पैंटी के ऊपर से ही चूत पर हाथ फ़िराने लगा।

वो मदहोश हो रही थी- अःह…अअ अह हह हह हह…ऊह्ह जैसी आवाजें निकालने लगी।

लोहा गरम है, यह सोच कर मैंने भी देर न करते हुए उसकी पैंटी उतार दी।

क्या मस्त चूत थी, बस मुँह लगा कर खा जाने का मन कर रहा था, उसकी ज़ांघें ऐसी सुन्दर सी थी कि मैं बस उन्हें चाटने लगा और वो मस्ती में ऊऊह्ह्ह…आह्ह्ह … किये जा रही थी।

मैंने उसकी टांगें चाटते चाटते उसकी चूत पर अपनी जुबान लगाई तो वो एकदम से उछल गई और अपने हाथों से मेरे बाल खींचने लगी जैसे मुझे पूरा अन्दर घुसा लेना चाहती हो। चूत चाटने में ही वो झड़ गई, उसकी चूत से पानी बाहर निकलने लगा था, एक मादक सी महक आ रही थी उसकी चूत से !

मैं बस चूसे जा रहा था, मेरे हाथ उसके टॉप उतारने में लगे थे, मेरे प्रयास को समझते हुए उसने खुद ही अपना टॉप उतार दिया।

तब मेरी नज़रें उसके वक्ष पर गड़ गई। मेर बचा-खुचा होश, वो भी चला गया।

मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा था, झट से मैंने अपने कपड़े उतार फेकें।

हमारी नज़र आपस में टकराई और मैं उसके ऊपर चढ़ गया, उसके होंठों को मुँह में लेकर चूसने लगा। वो पूरा सहयोग कर रही थी, हमारे बीच अब कोई भी पर्दा नहीं रह गया था।

मैं हाथों से उसके चूचे दबा रहा था और लण्ड नीचे चूत से टकरा रहा था। हम ऐसी हालत में थे कि हमसे बरदाश्त नहीं हो रहा था, बस एक दूसरे में समा जाने को मचल रहे थे, जैसे ही उसके होंठों को मैंने छोड़ा, वो कहने लगी- चोदो मुझे ! चूत अब गीली होकर बहने लगी है, डाल दो अपना लण्ड ! चोदो मुझे ! अब नहीं रहा जा रहा है !

मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर लगाया और एक बार में ही आधा लण्ड अन्दर घुस गया। चूत बहुत ही गीली थी। दूसरे धक्के में पूरा 6 इंच का मोटा लण्ड उसे चोद रहा था।

उसकी मदहोश करने वाली आवाज़ पूरे कमरे में गूज़ रही थी- आ…आआ…आ…ईईईई मरर…. गग……ईई ईई ई ई ई…ईईई….. जोर से चोदो… फाड़ दो मेरी चूत को… चोदो… और जोर से.. !

हम दोनों अपनी मस्ती में जोरदार चुदाई का आनन्द ले रहे थे लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मन्जूर था…

अभी चुदाई चल ही रही थी कि मुझे किसी के होने का अहसास हुआ… !

अभी आगे और भी है उसे भी किसी दिन ज़रूर सुनाऊँगा।

दोस्तो कैसी लगी मेरी आपबीती? जरूर बताइएगा !

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