Sunday, 2 February 2014

दोस्ती का आनन्द

दोस्ती का आनन्द

मेरा नाम विनोद है, मैं औरंगाबाद महाराष्ट्र से हूँ।

दोस्तो, जिंदगी में सेक्स ही सब कुछ नहीं पर सेक्स के बिना जिन्दगी अधूरी है। मैंने अपने जिन्दगी में न जाने कितनी औरतों के साथ सेक्स किया पर उसके पीछे कुछ और ही कहानियाँ हैं जो मैं आपके सामने रखने जा रहा हूँ। आशा करता हूँ आप सभी पसंद करेंगे।

सबसे पहले मैं आपको अपनी वो कहानी बताऊँगा जो मेरे लिए बहुत अहम है।

मेरा एक दोस्त है जिसका नाम योगेश है। योगेश और मैं हमारे गाँव से बचपन के दोस्त हैं। दसवीं तक हम साथ में थे, बाद में मैं चाचा के पास चला गया, दो साल चाचा के पास रहने के बाद मैं काफी बिगड़ चुका था इसलिए पिताजी ने मुझे फिर अपने पास बुला लिया। जब लौटा तो मेरे दोस्त योगेश की मानसिकता में बहुत बदलाव आ गया था, वो सबसे दूर रहने लगा, खुद को कमजोर और नालायक समझने लगा, इसी वजह से मैं भी उससे दूर हो गया।

जिंदगी के सफ़र में कई मक़ाम गुजर गए, इन पाँच सालों में मैं काफी चुदक्कड़ बन गया था, यह बात योगेश भी जानता था। अभी मैं एक कंपनी में सुपरवाइज़र के तौर पर काम करता हूँ।

बात जून 2011 की है, मैं रात को अपनी ड्यूटी ख़त्म करके बारिश में भीगने के बाद अपने घर लौटा था, मैं और मेरी बीवी खाना खाने के बाद कुछ मस्ती कर रहे थे, तभी बेल बजी, मैंने दरवाजा खोला तो देखा मेरा दोस्त योगेश बारिश में भीग कर खड़ा था।

मैंने उसे अन्दर बुला लिया, तभी मुझे उसके मुँह से शराब की गंध आई। मैं हैरान था कि इतना शरीफ लड़का दारू पीकर आया है। इस बात पर मैं परेशान था, मैंने उसे अपने कपड़े देकर तौलिया दिया।

उसके कपड़े बदल लेने के बाद मैंने उसे अचानक आने का कारण पूछा तो उसने एक बार मेरी बीवी किरण की तरफ देखकर 'ऐसे ही मन किया इसलिए मिलने चला आया' कह दिया।

पर मुझे कुछ गड़बड़ लगी। किरण कुछ खाने के लिए लाने गई तभी उसने मुझे बाहर चलने को कह दिया। मैंने अपने कपड़े बदले, किरण को कहा- हम बाहर ड्रिंक करके लौटेंगे, तुम सो जाना।

मैंने अपनी गाड़ी निकाली और हम कुछ देर में बार में पहुँच गए। पेट में शराब जाने जाने बाद वो कुछ दुखी होकर बातें करने लगा।

मैंने पूछा- यार मैं तेरा दोस्त हूँ, तू मुझे बता कि क्या परेशानी है..

ऐसा कहते ही उसने कहा- इसीलिए तो मैं तेरे पास आया हूँ। मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं पर मुझे अभी तक औलाद का सुख नहीं मिला। मैं सेक्स तो करता हूँ पर मुझमें शायद कुछ कमजोरी है। देख यार, और भी बहुत तरीके हैं पर मैं तुझे बचपन से जानता हूँ और तू मुझे पहले से ही हीरो लगता है, मैं चाहता हूँ मेरा वारिस तेरे जैसा हो।

यह सुनकर मुझे तो करंट लग गया। मैंने उसे बहुत समझाने की कोशिश की पर आखिर मानते हुए मैंने पूछा- तेरी बीवी इस बात को मानेगी क्या?

उसने कहा- वो तू मुझ पर छोड़ दे, तू सिर्फ प्लान के मुताबिक चल !

दो दिन के बाद मैं योगेश के घर पहुँच गया, दरवाजा उसकी बीवी नेहा ने खोला तो मैं देखता ही रह गया। बिल्कुल डर्टी गर्ल थी, उसके होंट बहुत ही मादक थे। उसने लाल रंग की साड़ी पहनी थी।

उसने मुझे नाम से बुलाते हुए अन्दर आने को कहा। मैं समझ गया कि योगेश ने उसे मेरे बारे में सब बताया है।

अन्दर जाते ही मैं सोफे पर बैठा, वो मेरे लिए चाय लेकर आई !

उसके पल्लू के नीचे छिपे दोनों चुच्चे ब्लाउज से बाहर आने के लिए बेताब हो रहे थे। मेरे मन में लड्डू फ़ूटने लगे थे पर उसकी नजर में अजीब सा दर्द नजर आ रहा था।

मैंने इधर उधर की बातें की और योगेश के बारे में पूछा।

उसने कहा- वो बाहर गए हैं, और कल शाम को लौटेंगे। उन्होंने मुझे सब बताया है, आप बेडरूम में जाकर बैठिये, मैं अभी आती हूँ।

ऐसा कह कर वो रसोई में चली गई मगर उसके बोलने में एक तरह का रूखापन, लाचारी महसूस हुई।

मैं बेडरूम में जाकर बैठा, कुछ देर बाद वो नाइटी पहने मेरे सामने गर्दन झुका कर खड़ी थी। नाइटी में वो क़यामत लग रही थी, उसके घुटनों तक का बदन देख कर मैं गर्म होने लगा पर मुझे उसके होंट बहुत पसंद आये थे, यह याद आते ही मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा और मुझे उसकी नापसंदगी समझ में आई।

मैंने उसे बेड पर बिठाया और कहा- देखो, मैं तुम पर कोई जबरदस्ती नहीं करने आया हूँ। अगर तुम्हें पसंद नहीं है तो मैं यहाँ से जाता हूँ।

उसने अचानक रोना शुरू किया- आप गलत मत समझें पर ये सब मैं मेरे पति के लिए कर रही हूँ। हमारे जीवन में इस कमी की वजह से हम काफी परेशान हैं। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने सोचा कि जो बीवी अपने पति के लिए इतना कर सकती है वो उसके लिए कुछ भी कर सकती है, मैंने उसके आँखें पौंछ कर उसके माथे को चूमा, उसने आँखें बंद कर ली। फिर मैंने उसके होंटों को चूमा.. चूमता ही रहा... फिर कान के नीचे... फिर गर्दन पर...

मैंने उसकी नाइटी उतारी, उसने ब्रा और चड्डी नहीं पहनी थी। उसका गोरा गठीला बदन देख कर मेरे अन्दर तो आग लग चुकी थी। उसके उरोज एकदम गुलाबी थे... मैं उसे बेहताशा चूमता गया... शुरू में तो वो सामान्य थी पर मेरे बढ़ने पर वो भी सुलगने लगी थी। अब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया, काफी देर उसकी चूचियाँ चूसने के बाद मैंने उसके नाभि पर अपनी जीभ फेरी तो वो थरथराने लगी... तब तक मेरा हाथ उसकी योनि तक पहुँच गया था। मैंने चूत मसलना शुरू किया तो वो कराहने लगी... मैंने अपनी जीभ उसकी चिकनी चूत में फेरनी शुरू की... अब वो सातवें आसमान पर थी... उसके मुँह से 'आह... उफ्फ्फ... उईइ... मर गई... हाँ... और करो...' ऐसी आवाजें निकल रही थी। इधर मेरा लंड भी खम्बा बन गया था, मैंने उसका हाथ मेरे लंड पर रख दिया, वो ऊपर से ही उसको मसलने लगी। शायद उसे लंड पसंद आया था, वो उसे बाहर निकलने की कोशिश करने लगी..

वो काम मैंने आसान करते हुए अपने पूरे कपड़े उतार दिए और 69 अवस्था में लेट गया... मैं आपको बता दूँ कि मैं चूत चूसने में बहुत माहिर हूँ... मैंने फिर ध्यान लगाकर उसकी चूत चुसनी शुरू की, जिस वजह से वो और तड़पने लगी...

मैंने अपना लिंग उसके मुख में देने की कोशिश की पर शायद उसने पहले कभी लंड चूसा नहीं था इसलिए वो उसे अपने हाथों से हिलाने लगी...

मैं बड़ी खूबी से चूत चूस रहा था, तभी उसने 'उई... माँ... आह...' करते हुए मेरे मुँह में अपना सारा रस छोड़ दिया...

अब मैं रुक नहीं पा रहा था, मैंने उसके दोनों पैर उठा कर अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया। मेरा लंड सामान्य मोटा है पर लम्बा 9 इंच है। जैसे ही लंड को धक्के से अन्दर डाला तो वो कराह उठी- ...प्लीज धीरे से करो.. बहुत दिन के बाद चुद रही हूँ..

मैं आहिस्ता से लंड अन्दर पेलने लगा। उसे और मजा आने लगा। जब पूरा लंड अन्दर पहुँच गया तो उसके चहरे पर सेक्स का आनन्द दिखने लगा.. अब उसने पहली बार पूरी आँखें खोल कर मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी..

मैंने अपनी गति बढ़ा दी... वो भी नीचे से उछलकर मेरा साथ देते हुए चिल्लाने लगी- ...डाल दो पूरा अन्दर... मेरी प्यास बुझा दो... और जोर से.. और...करो...चोदो मुझे...आह...उफ़.. उई..माँ..

मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा...तभी वो अकड़ने लगी.. मेरा भी छुटने लगा... मैं उसके मुँह में देना चाहता था पर रस उसकी योनि के अन्दर डालना ही मेरा असली काम था... मैंने चूत के अन्दर पिचकारी छोड़ दी और उसके बदन पर गिर पड़ा।

20 मिनट की चुदाई के बाद हमने आराम किया और शाम को फिर से सेक्स का खेल खेलने लगे। मैंने दो दिन उसकी चुदाई की, उसके बाद योगेश घर लौटा, उसने मुझसे वादा लिया- जब तक नेहा गर्भवती नहीं होती, तुझे हफ्ते में दो बार नेहा को चोदने के लिए आना पड़ेगा !

यह कह कर योगेश ने मुझे विदा किया। इन सब बातो में यह बात सिर्फ हम तीनों तक ही सीमित रखने का वादा भी लिया...

अगले महीने की माहवारी न आने से चेकअप करने के बाद ख़ुशी की खबर मिली... योगेश मुँह मीठा कराने घर आया तो आँखों में आँसू लाकर बोला- ..यार तूने सच्ची दोस्ती निभाई...

और मैं कमीना चोदू सोच रहा था कि अब नेहा की चूत चोदने को नहीं मिलेगी क्योंकि अब उसका काम हो गया था।

वैसे नेहा से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी...

आपको कहानी कैसी लगी, मुझे मेल पर जरूर बताइयेगा... जल्द ही लौटूंगा एक और सच्ची कहानी के साथ...

आपका विनोद

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