Wednesday, 22 May 2013

सब कुछ करना होता है - Sab Kuchh Karna Hota Hai

सब कुछ करना होता है  - Sab Kuchh Karna Hota Hai

मेरा नाम स्वर्णिम है, मैं टाटा स्टील (जमशेदपुर) का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र २३ साल है, देखने या मिलने के बाद आप सभी लड़कियों को पता चल ही जायेगा कि मेरा शरीर और लंड कितना सख्त है।

यह बात है अगस्त, 2009 की ! मुझे एक कॉल आई मेरे मोबाइल पे करीबन 11 बजे दिन में ! उस तरफ से एक बड़ी ही प्यारी आवाज़ आई- हेलो ! मिस्टर स्वर्णिम?

मैंने भी कहा- यस, स्वर्णिम स्पीकिंग !

उसने कहा- मैं इप्शिता बोल रही हूँ ! एक निजी बैंक से !

(माफ़ कीजियेगा मैं बैंक का नाम नहीं बताना चाहूँगा)

उसने कहा- सर, मुझे आपसे एक बिज़नस प्लान के सिलसिले में आपसे अप्पॉंयंट्मेंट चाहिए !

मैंने पता नहीं कैसे उसे कह दिया- ओ के ! शनिवार को एक बजे आ जाना !

जब शनिवार का दिन आया करीब डेढ़ बजे एक बड़ी खूबसूरत क्यूट सी लड़की मेरे केबिन में एक लड़के से साथ आई और बोली- हेलो सर ! मैं इप्शिता फरोम ..... बैंक !

असल में मैं भूल गया था कि आज वो आने वाली है। मैंने भी हेलो किया और और बैठने को कहा। मैं तो उसके चहरे से नज़र हटा ही नहीं पा रहा था, गजब की खूबसूरत थी वो !

करीब एक घंटे तक वो और उसका साथी मुझे कुछ बिज़नस प्लान के बारे में बताते रहे पर मेरे ध्यान तो कहीं और ही था। मैं सोच रहा था कि पता नहीं कौन इसका बॉयफ्रेंड होगा जो भी होगा, इसके बाद ओ कभी भी दूसरी लड़की के बारे में कभी भी नहीं सोचेगा !

मैं खोया हुआ था, तभी इप्शिता ने कहा- सर, कहिये अगली बार कब मिलूं?

मैंने कहा- आप सोमवार को आ जाओ ! मैं सासे पेपर तैयार रखूँगा !

इप्शिता ने कहा- ओ के सर ! मैं सोमवार आ जाऊँगी करीब चार बजे !

मैंने कहा- ओके !

सोमवार को करीब सवा चार बजे इप्शिता अकेले आई। मैंने कहा- आज आप अकेले ?

तो इप्शिता ने कहा- मेरे कलीग को कहीं और जरुरी काम से जाना था तो वो वहाँ चले गए !

पेपर वर्क करते करते तकरीबन दो घंटे लग गए। शाम के सात बज रहे होंगे, वो जाने को हुई, मैंने कहा- इतनी देर हो गई है, मैं छोड़ देता हूँ !

तो उसने मना कर दिया। मैंने भी ज्यादा कोशिश नहीं की। दस मिनट के बाद जब मैं भी निकला तो देखा बाहर काफी बारिश हो रही थी और इप्शिता अपनी स्कूटी स्टार्ट करने में लगी हुई थी।

मैं इप्शिता के पास गया और पूछा- कोई प्रॉब्लम?

तो इप्शिता ने कहा- सर यह स्टार्ट नहीं हो रही है !

मैंने कहा- इतनी बारिश में कैसे जाओगी ?

तो इप्शिता ने कहा- पता नहीं बारिश कब रुकेगी और मैं कब घर जाउंगी ! वैसे मैंने तो कह रखा है घर पर कि देर हो जायेगी लेकिन बारिश रुक ही नहीं रही है तो सोचा भीग कर ही चली जाऊं !

मैंने कहा- अगर आप को कोई प्रॉब्लम न हो तो आप गाड़ी यहीं छोड़ दो, मैं अपनी कार में आपको छोड़ दूंगा !

वो बोली- नहीं सर ! मैं मैनेज कर लूँगी !

मैंने कहा- मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं होगी अगर आपको कोई प्रॉब्लम है तो कोई बात नहीं !

तो इप्शिता बोली- नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है, ठीक है चलती हूँ।

मैंने चौकीदार से कहा- स्कूटी को पार्क कर दो !

और इप्शिता को अपनी कार में बैठने को कहा, वो बैठ गई।

मैंने पूछा- कहाँ रहती हो?

वो बोली- टेल्को में !

मेरे ऑफिस से टेल्को काफी दूर था, करीब 35-40 मिनट का रास्ता था, इप्शिता थोड़ी भीग चुकी थी और मेरे कार का ए सी चालू था, उसको ठण्ड लग रही थी लेकिन कह नहीं रही थी कि उसे ठण्ड लग रही है। मैंने देखा इप्शिता के होंठ कांप रहे थे ठण्ड के चलते !

मैंने कहा- इप्शिता ठण्ड लग रही है क्या ?

वो बोली- नहीं !

मैंने कहा- आप कांप क्यों रही हो ? अगर ठण्ड लग रही है तो एसी बंद कर देते हैं !

हम लोग बात करते करते घर पहुँच गए। वो बोली- सर कॉफी पी कर चले जाइयेगा !

मैंने कहा- नहीं देर हो गई है, किसी और दिन कॉफी पीने आ जाऊंगा !

मैंने बाय किया और कार स्टार्ट करने लगा तभी कार की बैटरी लो गई, कार स्टार्ट नहीं हो रही थी। काफी कोशिश के बाद भी स्टार्ट नहीं हो रही थी। इप्शिता वापस आई, बोली- सर, क्या हुआ?

मैंने कहा- शायद जो प्रॉब्लम आपकी गाड़ी में हुई वही मेरे भी गाड़ी में हो गई है !

सर, आप वापस कैसे जाओगे?

अब देखता हूँ, अगर कोई ऑटो मिल जायेगा तो उसी से चला जाऊंगा।

बारिश के कारण ऑटो भी नहीं मिल रही थी तो इप्शिता ने कहा- आप मेरे घर आ जाइए !

मैंने भी कहा- ठीक है शायद तब तक कुछ मैनेज हो जाए !

मैं इप्शिता के साथ उसके घर चला गया। घर पर उसकी मम्मी थी, इप्शिता ने अपने मम्मी को सारी बात बता दी। तब आंटी ने कहा- बेटा, तुम्हारे घर वाले परेशान हो जाएँगे, तुम उनको फ़ोन कर के बता दो !

तब मैंने कहा- आंटी, मैं यहाँ अकेले ही रहता हूँ !

आंटी ने कहा- ठीक है बेटा ! तुम फ्रेश हो जाओ ! मैं खाना लगा देती हूँ !

इप्शिता मुझे अपने कमरे में ले गई और अपने पापा की नाईट-ड्रेस और तौलिया दिया। मैं फ्रेश हो कर आ गया। हम तीनों ने खाना खाते-खाते काफी बातें की। तब मुझे यह भी पता चला कि इप्शिता के पापा ऑफिस के काम से कोलकाता गए हुए हैं और वो अगले दिन वापस आयेंगे। हम लोग खाना खाने के बाद टीवी देखने लगे। थोड़ी देर में आंटी बोली- मुझे नींद आ रही है, मैं सोने जा रही हूँ, तुम लोग भी आराम कर लो !

मैंने कहा- ठीक है आंटी !

आंटी के जाने के बाद करीब तीस मिनट बाद हम लोग भी सोने की तैयारी करने लगे। मैंने पूछा- इप्शिता, यह कमरा आपका है क्या ?

वो बोली- हाँ सर ! यह कमरा मेरा है !

मैंने कहा- मैं यहाँ सो जाऊंगा तो आप कहाँ सोओगी?

वो बोली- मैं हाल में सो जाउंगी !

मैंने कहा- आप यहीं सो जाओ ! हाल में मैं सो जाऊंगा !

वो बोली- नहीं सर ! कोई प्रॉब्लम नहीं है ! आप यहीं सो जाओ !

ठीक है इप्शिता, जब तक नींद नहीं आती, हम लोग बात करें?

वो बोली- हाँ सर, ठीक है !

हम लोगों ने काफी बातें की। रात का करीब एक बज चुका था, मुझे लगा कि इप्शिता को नींद आ रही है, मैंने पूछा- इप्शिता, आपको तो नींद आ रही है !

वो बोली- हाँ सर ! नींद आने लगी है !

मैंने कहा- इप्शिता, आप मुझे सर-सर मत बोलो ! ऐसा लगता है कि मैं अभी भी ऑफिस में ही हूँ। मेरा नाम है स्वर्णिम ! आप मुझे मेरे नाम से बुला सकती हो !

ठीक है कोशिश करूँगी !

मैंने कहा- कोशिश नहीं ! बोलो !

यस ! ठीक ! स्वर्णिम अब मैं जा रही हूँ !

और वो चली गई। करीब 15 मिनट के बाद जब ओ वापस आई तो अपनी नाईट-ड्रेस में थी, वापस आकर बोली- स्वर्णिम ! मैंने तो गुड नाईट कहा ही नहीं था !

मैंने कहा- ओ हाँ ! मैंने भी तो नहीं कहा था !

इप्शिता बोली- गुड नाईट !

मैंने कहा- अगर बुरा नहीं मानो तो एक बात कहूँ?

वो बोली- नहीं मानूंगी स्वर्णिम ! बोलो !

मैंने कहा- आप इस ड्रेस में काफ़ी क्यूट दिख रही हो ! आपका कोई बॉय-फ्रेंड तो होगा ही !

इप्शिता काफी जोर से हंसने लगी, मैंने कहा- क्या हुआ ? मैंने कोई चुटकला तो नहीं सुनाया !

वो बोली- नहीं ! ऐसी बात नहीं ! मैं जहाँ भी गई, किसी न किसी ने मुझे प्रपोज़ किया- स्कूल, कॉलेज, ऑफिस सभी जगह ! पर मुझे यह सब बिलकुल भी पसंद नहीं है ! मेरा मानना है कि यह सब टाइम पास करने के लिए होता है !

इप्शिता ने कहा- स्वर्णिम, तुम ने कभी किसी को प्यार किया है ?

मैंने कहा- हाँ मैंने प्यार किया है और उसी से शादी भी करूँगा !

ओ सॉरी ! मैंने शायद कुछ गलत कह दिया ! इप्शिता ने कहा।

मैंने कहा- नहीं इप्शिता, तुमने जो महसूस किया वही तो कह रही हो !

मैंने कहा- इप्शिता तुम बहुत खूबसूरत हो ! जिसे तुम मिल जाओगी, वो कभी भी किसी और के पास नहीं जायेगा !

इप्शिता ने कहा- ऐसी क्या चीज़ है मुझ में ?

मैंने कहा- सभी चीज़ है इप्शिता ! तुम्हारा व्यव्हार, तुम्हारी खूबसूरती !

इप्शिता ने पूछा- स्वर्णिम, तुम्हें क्या-क्या अच्छा लगा मुझ में?

मैंने कहा- सभी चीज़ इप्शिता !

इतना कह कर मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। इप्शिता कुछ नहीं बोली। धीरे-धीरे मैं उसके हाथ को दबाने लगा। जैसे ही मैंने इप्शिता को छुआ उसकी सांसें तेज़ होने लगी और कांपने लगी। मैं धीरे से उसके बालों को सहलाने लगा। वो कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं थी।

तभी उसने कहा- स्वर्णिम, काफी अच्छा लग रहा है ! ऐसे ही करते रहो !

मुझे लगा कि शायद इप्शिता गरम होने लगी है, मैं धीरे से अपने हाथ उसकी चूची की तरफ ले गया और सहलाने लगा। उसे काफी अच्छा लगने लगा। ऐसे करीब दस मिनट तक करता रहा और एकाएक सब कुछ करना छोड़ दिया।

इप्शिता बोली- क्या हुआ स्वर्णिम?

मैंने कहा- इप्शिता, शायद हम लोग गलत कर रहे हैं !

तो इप्शिता ने कहा- स्वर्णिम, मैं अपनी इच्छा से कर रही हूँ, तुम जबरदस्ती तो नहीं कर रहे हो !

मैंने कहा- इप्शिता, इसके पहले कभी तुमने किसी के साथ सेक्स किया है?

वो बोली- स्वर्णिम, अभी तक किसी लड़के ने मुझे छुआ तक नहीं ! सेक्स तो बहुत दूर की बात है !

मैंने कहा- इप्शिता, तुम क्या मेरे साथ कम्प्लीट सेक्स करोगी?

वो बोली- नहीं स्वर्णिम ! एक लिमिट तक !

मैंने कहा- कोई बात नहीं ! ठीक है !

इप्शिता उठी, कमरे को अन्दर से बन्द कर लिया और आकर मुझसे लिपट गई। उसकी चूची मेरे सीने से दबने से मेरा लंड जागने लगा। मैंने भी इप्शिता को चूमना शुरु किया। काफी लम्बा चुम्बन उसके होंठों पर लिया, साथ में उसकी चूची दबाने लगा। मैं मन ही मन सोच रहा था कि ऐसी हसीना मेरे बाहों में होगी, वो भी कंवारी ! सोचा न था !

इप्शिता के वक्ष का आकार काफी अच्छा था। चूची भी एकदम टाइट !

होंठों पर चुम्बन के साथ जब मैं उसके स्तन मसल रहा था तो उसके मुँह से आहऽऽ ऊउईऽ औऽऽ आह की आवाज़ आ रही थी।

मैं फिर उसके नाईट ड्रेस के टॉप का बटन खोलने लगा, इप्शिता ने मना नहीं किया। टॉप खोलकर देखा तो अन्दर काले रंग की ब्रा पहने हुई थी। मैंने उसको भी खोल दिया। अब वो ऊपर से बिल्कुल नंगी थी। फिर मैं उसकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा। इप्शिता को काफी मज़ा आ रहा था, उसके मुँह से आह ऊई ऊउम्ह हाह ऊउफ आह की आवाज़ आने लगी थी।

तभी मैंने कहा- इप्शिता और कुछ करूँ?

तो वो बोली- स्वर्णिम, मुझे नहीं पता था कि यह सब करने से इतना अच्छा लगता है ! अब तुम जो करना चाहते हो कर सकते हो, मैं अब रोकूँगी नहीं ! और तुम रुकना मत !

मैंने कहा- ठीक है स्वीट हार्ट !

मैंने उसको बिलकुल नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया। जब मैं नंगा हो रहा था तो उसकी आँखें बंद थी क्योंकि उस समय मैं उसकी चूची लगातार दबा रहा था। थोड़ी देर के बाद जब मैंने उसके हाथों में अपने लंड पकड़ाया तो वो एकदम से घबरा गई, बोली- स्वर्णिम, स्वीट हार्ट ! यह इतना बड़ा?

तब तक मेरा लंड पूरे आकार में आ चुका था। मैंने कहा- एश ! स्वीट हार्ट ! अब मेरा लंड लेकर इसको चूसो !

वो भोली भाली लड़की कुछ नहीं जानती थी, वो कुछ बोली नहीं !

मैंने कहा- यह सब कुछ करना होता है सेक्स में !

पहले तो नहीं मान रही थी, फिर धीरे-धीरे मान गई। उसके मुँह में पूरा लंड जा ही नहीं रहा था, न वो ठीक से चूस पा रही थी। फिर मैंने इप्शिता को कहा- इसको लॉलीपोप की तरह चूस !

फिर वो लंड को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। इप्शिता के मुँह की गर्मी से मेरा लंड और बड़ा होता जा रहा था। दस मिनट चूसने के बाद मैंने अपने वीर्य उसके मुँह में ही डाल दिया। वो कुछ नहीं बोली क्योंकि वो पूरे जोश में आ चुकी थी।

फिर धीरे धीरे उसने मेरा लंड फिर खड़ा किया। फिर हम लोग 69 की पोज़ीशन में आ गए। मैंने उसकी बूर को चूसना और चाटना शुरु किया और उसने मेरा लंड !

इस तरह हम लोग काफ़ी देर तक एक दूसरे का लंड-बूर चूसते रहे।

अब बारी आई चुदाई की !

मैंने कहा- इप्शिता, मुझे तुम्हारी बूर में लंड डालना है !

इप्शिता बोली- स्वर्णिम, तुम्हारा लंड इतना बड़ा है और मेरी बूर इतनी छोटी है ! कैसे जायेगा ?

मैंने कहा- इप्शिता, पहले-पहले दुखेगा ! फिर मज़ा आएगा !

वो बोली- ठीक है स्वर्णिम ! प्लीज़, धीरे-धीरे चोदना !

मैंने अभी दो इन्च ही अन्दर डाला होगा, वो चिल्लाने लगी- नहीं नहीं स्वर्णिम ! बाहर निकालो लंड ! और नहीं सहा जाता !

मैंने कहा- ठीक है इप्शिता !

मैंने लंड बाहर नहीं निकाला और बोला- मैं थोड़ी देर रुकता हूँ !

उसकी आँख से आँसू निकल रहे थे। फिर थोड़ी देर बाद धीरे धीरे इप्शिता के बूर में लंड डालने लगा। मैंने जब ध्यान से देखा तो खून आ रहा था। मैं समझ गया कि इप्शिता की सील मैंने ही तोड़ी है और वो जो कुछ भी बोल रही थी, सच बोल रही थी।

फिर मैंने चोदना जारी रखा। अब इप्शिता को भी मज़ा आने लगा। धीरे-धीरे मैंने स्पीड बढ़ा दी। इप्शिता के मुँह से जोर-जोर से आवाज़ आने लगी- आह ऊई ऊउम्ह औच आही अहह और जोर जोर से डाल लंड स्वर्णिम ! बहुत अच्छा लग रहा है !

मैंने और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। फिर हम लोग करीब बीस मिनट के बाद झड़ गए। मैंने अपना वीर्य उसके अन्दर उसकी बूर में ही डाल दिया और इस तरह मैंने इप्शिता की रात भर छः बार चुदाई की।

और जब मैं सुबह को जगा तो आठ बज चुके थे।

इप्शिता नहा-धोकर तैयार होकर चाय लेकर मेरे पास आई और बोली- स्वर्णिम स्वीट हार्ट ! गुड मोर्निंग !

मैंने कहा- आंटी कहाँ हैं?

इप्शिता बोली- मंदिर गई हैं !

मैंने कहा- इप्शिता जानू आओ न ! मेरा लंड चूसो !

वो बोली- स्वर्णिम, मम्मी आ जाएंगी ! बाहर का गेट तो बंद है न ? जब आएंगी तो पता चल जायेगा !

वो बोली- ठीक है !

फिर मैंने अपना लंड उसको पकड़ा दिया और वो लंड चूसने लगी। बीस मिनट तक चूसने के बाद फिर वीर्य मैंने उसके मुँह में ही गिरा दिया।

फिर नहा धोकर वापस चला गया।

दोस्तो, यह कोई कहानी नहीं ! यह मेरे साथ हुआ सच्चा वाकया है। इसके बाद अब हम लोग अक्सर मिलते हैं और जब कभी भी मिलते हैं तो चुदाई जरुर करते हैं।

मेरी यह सच्ची घटना कैसी लगी, जरुर बताइएगा।

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